Search This Blog

Jun 28, 2015

इक पन्ना है बरसों से खाली

मैं तुम्हारे किताब का वो पन्ना हूँ
जो इस वजह से जुड़ गयी
क्योंकि हर किताबं में कुछ पन्ने
यूहीं शामिल कर दिये जातें हैं।

कुछ लोग ऐसे पन्नों में
अपने नाम लिख छोड़ देते हैं
तो कुछ लोग इन्हें
खाली ही रहने देते हैं।

मैं तुम्हारे वक़्त का वो छन हूँ
जिनके होने न होने से
ज़िन्दगी की रफ़्तार में
कोई खास फरक नहीं पठति
कुछ पल ऐसी भी होते हैं
जिनमे ज़िन्दगी कभी जीई नहीं जाती
आप ही गुज़र जाती है।

में तुम्हारे दिल का
वोह खली कमरा हूँ
जो केवल छट दीवाली होली में
खोल साफ कर दी जाती।

सितमगर मेरी, मेरी जुस्तजू
गर वक़्त मिले तो इन खली पन्नों पर
इक कलम चला देना
बस एक करम करना
with love के बाद
अपना ही नाम लिख देना।

1 comment:

  1. irrespective of the book, the page too has its own existence and identity...
    sometimes i mark my favourite pages in an otherwise normal book
    and revisit them...:)

    ReplyDelete

That City Girl

For me you have been a traveler The one who rides the oceans and the big blue seas Seeking experiences That can be framed into postcar...